
पेपर लीक रोकने वाला बिल राज्यसभा से पास, विपक्ष ने किया वॉकआउट
देश भर में परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं वर्षों से लाखों छात्रों की नींद उड़ाती रही हैं, और अब इसी समस्या से निपटने के लिए संसद ने एक बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पास कर दिया है। हालांकि यह पल जितना ऐतिहासिक था, उतना ही हंगामेदार भी रहा, क्योंकि विधेयक पर चर्चा के बाद जवाब देने का वक्त आते ही विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
बिल पास कैसे हुआ
गुरुवार को राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब आठ घंटे तक चर्चा चली। जब केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह चर्चा का जवाब देने के लिए खड़े हुए, ठीक उसी वक्त कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद सदन से उठकर बाहर चले गए। इसके बाद बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया गया। एक दिन पहले ही लोकसभा में भी यही विधेयक करीब दस घंटे की चर्चा और बार-बार के हंगामे के बीच पास हो चुका था।
विपक्ष ने वॉकआउट क्यों किया
विपक्षी सांसदों की मांग थी कि इस विधेयक पर बहस का जवाब खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दें, न कि राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने यह मांग खारिज कर दी और जितेंद्र सिंह को ही सरकार का जवाब पेश करने को कहा। इसी बात से नाराज होकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्य सदन छोड़कर चले गए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सदन से गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे।
सरकार और विपक्ष का आमना-सामना
सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के इस कदम को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि विपक्ष के पास अब उठाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा, इसलिए वह चर्चा के अहम मौके पर सदन से भाग खड़ा हुआ। दूसरी ओर, खरगे ने विधेयक को महज दिखावटी बदलाव करार दिया और कहा कि जरूरत एक राष्ट्रीय युवा रोजगार नीति की भी है। खरगे ने छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिसिया सख्ती के लिए भी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
आखिर बिल में है क्या
इस संशोधन विधेयक के जरिए मौजूदा पेपर लीक विरोधी कानून को और सख्त बनाया गया है। इसमें कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है, साथ ही समयबद्ध जांच और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने की बात भी कही गई है। सरकार का दावा है कि इन बदलावों से संगठित तरीके से होने वाली परीक्षा धांधली पर लगाम लगेगी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। जितेंद्र सिंह ने सदन में यह भी कहा कि देश में पेपर लीक रोकने का पहला व्यापक कानून मोदी सरकार ने ही 2024 में बनाया था, और यह विधेयक उसी दिशा में अगला कदम है।
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अब आगे क्या होगा
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह औपचारिक रूप से कानून बन जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब देश के कई राज्यों में परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों में गुस्सा और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा था, और सरकार पर सख्त कानून बनाने का दबाव भी बढ़ रहा था।