
भारतीय नागरिकता कैसे मिलती है:
जानें प्रक्रिया, जरूरी शर्तें और CAA से जुड़ी हर अहम जानकारी
भारत की नागरिकता हासिल करना कई लोगों के लिए सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नई पहचान और नए जीवन की शुरुआत जैसा होता है. चाहे कोई व्यक्ति विदेश में जन्मा भारतीय मूल का हो, किसी भारतीय नागरिक से विवाह कर चुका हो, या फिर पड़ोसी देशों से आकर वर्षों से भारत में रह रहा हो, हर किसी के लिए नागरिकता पाने का रास्ता कानून में साफ तौर पर तय किया गया है। गृह मंत्रालय के अधीन आने वाला ऑनलाइन पोर्टल आज इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक आसान और पारदर्शी बना चुका है।
नागरिकता मिलने के कितने तरीके हैं
नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के अनुसार भारत की नागरिकता चार अलग-अलग आधारों पर हासिल की जा सकती है — जन्म से, वंशानुक्रम से, पंजीकरण से और देशीयकरण यानी नैचुरलाइजेशन से. हर आधार की अपनी अलग पात्रता शर्तें और दस्तावेजी जरूरतें होती हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आवेदक किस श्रेणी में सबसे सटीक बैठता है, क्योंकि गलत श्रेणी में आवेदन करने पर पूरी प्रक्रिया में देरी हो सकती है ।
पंजीकरण के जरिए नागरिकता किन्हें मिल सकती है
नागरिकता अधिनियम की धारा 5 के तहत पंजीकरण के जरिए नागरिकता पाने के कई अलग-अलग रास्ते हैं। इसमें भारतीय मूल का कोई व्यक्ति, किसी भारतीय नागरिक से विवाहित व्यक्ति, भारतीय नागरिक माता-पिता की नाबालिग संतान, ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता दोनों पहले से भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हैं, वे लोग जो खुद या जिनके माता-पिता में से कोई एक स्वतंत्र भारत का नागरिक रह चुका हो, और ओसीआई कार्डधारक शामिल हैं। इन सभी श्रेणियों के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए गए हैं, जिनका चयन आवेदक की स्थिति के अनुसार पोर्टल पर दिए गए प्रश्नावली के जरिए खुद-ब-खुद हो जाता है।
देशीयकरण यानी नैचुरलाइजेशन का रास्ता
जो व्यक्ति ऊपर बताई गई किसी श्रेणी में नहीं आते, लेकिन लंबे समय से भारत में रह रहे हैं, उनके लिए नागरिकता अधिनियम की धारा 6 के तहत देशीयकरण का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए आवेदक को तय निवास अवधि और अन्य शर्तें पूरी करनी होती हैं, जिनका पूरा विवरण नागरिकता अधिनियम 1955 में दिया गया है. इस श्रेणी के लिए फॉर्म VIIIA निर्धारित किया गया है, और आवेदन की प्रक्रिया भी बाकी श्रेणियों जैसी ही ऑनलाइन प्रणाली के जरिए पूरी की जाती है।
CAA 2019 के तहत विशेष प्रावधान क्या है
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत एक विशेष प्रावधान रखा गया है, जो खासतौर पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के उन व्यक्तियों के लिए है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे व्यक्ति पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धारा 3(2)(सी) के तहत छूट प्राप्त हों या विदेशी अधिनियम 1946 के प्रावधानों से मुक्त हों। इस श्रेणी के लिए आवेदन धारा 6बी के तहत किया जाता है, और इसके लिए पोर्टल पर एक अलग ऑनलाइन सेवा तथा मोबाइल एप्लिकेशन भी उपलब्ध कराई गई है।
आवेदन की प्रक्रिया कैसे काम करती है
नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले हर व्यक्ति के पास अपना निजी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया इन्हीं के जरिए ट्रैक की जाती है। पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद आवेदक को अपनी स्थिति के अनुसार बताए गए फॉर्म को भरना होता है, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं, और 50 रुपये का निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होता है। आवेदन के समय ही आवेदक यह विकल्प भी चुन सकता है कि उसे प्रमाणपत्र की डिजिटल कॉपी चाहिए या स्याही से हस्ताक्षरित मूल प्रति, हालांकि मूल प्रति सिर्फ उन्हीं को दी जाती है जिन्होंने आवेदन के समय इसका विकल्प चुना हो।
सत्यापन और शपथ की प्रक्रिया
आवेदन जमा होने के बाद उसे जिला स्तरीय समिति द्वारा जांचा जाता है, और दस्तावेज सही पाए जाने पर आवेदक को एक तय तारीख पर सभी मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए ईमेल या एसएमएस के जरिए सूचित किया जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद पदनामित अधिकारी आवेदक को निष्ठा की शपथ दिलाते हैं, जो धारा 5 के तहत पंजीकरण या धारा 6 के तहत देशीयकरण दोनों ही मामलों में अनिवार्य होती है। इसके बाद पूरा मामला सशक्त समिति के पास भेजा जाता है, जो सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लेती है।
आवेदन के बाद क्या होता है
एक बार सशक्त समिति द्वारा आवेदन को मंजूरी मिल जाने पर आवेदक को नागरिकता का प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।यह प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में उपलब्ध होता है, जबकि हस्ताक्षरित मूल प्रति उन्हीं आवेदकों को दी जाती है जिन्होंने शुरुआत में यह विकल्प चुना था, और इसे संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी में स्थित जनगणना संचालन निदेशक के कार्यालय से प्राप्त करना होता है। आवेदन की स्थिति की जानकारी पूरी प्रक्रिया के दौरान पोर्टल पर ऑनलाइन देखी जा सकती है, और हर महत्वपूर्ण अपडेट की जानकारी आवेदक को ईमेल और एसएमएस के जरिए भी दी जाती रहती है।
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किन बातों का रखें ध्यान
नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे शुरुआत में ही सही श्रेणी और फॉर्म का चुनाव करें, क्योंकि गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेजों के कारण प्रक्रिया में काफी देरी हो सकती है। साथ ही ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद इसकी एक प्रति निकालकर संबंधित जिला कलेक्टर या विदेश में रहने वालों के मामले में भारतीय दूतावास के कार्यालय में जमा करना भी जरूरी होता है। किसी भी तकनीकी दिक्कत की स्थिति में आवेदक गृह मंत्रालय की हेल्पडेस्क से सीधे संपर्क कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया से जुड़ी उलझनों को समय रहते सुलझाया जा सके।
1. भारत की नागरिकता कितने तरीकों से प्राप्त की जा सकती है?
भारत की नागरिकता जन्म, वंशानुक्रम, पंजीकरण और देशीयकरण (Naturalization) के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है
2. भारतीय नागरिकता के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिक से विवाहित व्यक्ति, ओसीआई कार्डधारक और पात्र विदेशी नागरिक कानून के अनुसार आवेदन कर सकते हैं
3. CAA 2019 किन लोगों पर लागू होता है?
CAA 2019 पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पात्र हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों पर लागू होता है, जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए हों
4. भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कैसे किया जाता है?
गृह मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करके संबंधित फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और निर्धारित शुल्क जमा करना होता है
5. नागरिकता आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?
आवेदक की श्रेणी के अनुसार पहचान पत्र, निवास प्रमाण, जन्म या वंश संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र मांगे जा सकते हैं