NEET Paper Leak Protest Case: प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, 28 जुलाई को अगली सुनवाई

NEET Paper Leak Protest

NEET Paper Leak Protest: सुप्रीम कोर्ट ने कहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित, 28 जुलाई को होगी सुनवाई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों से चल रहे छात्रों के प्रदर्शन ने अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक अपनी गूंज पहुंचा दी है. नीट परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन जब पुलिस कार्रवाई की तस्वीरों के साथ सुर्खियों में आया, तो देश की सबसे बड़ी अदालत ने खुद इस मसले पर संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा पूरी तरह गारंटीशुदा है।

आंदोलन शुरू कैसे और कब हुआ
यह प्रदर्शन जून महीने में एक ऑनलाइन समूह कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर जंतर-मंतर से शुरू हुआ था, जिसकी मुख्य मांग नीट परीक्षा में हो रहे पेपर लीक और गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय करना थी. शुरुआत में यह प्रदर्शन सीमित दायरे में था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, इसमें छात्रों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहने वालों की भागीदारी लगातार बढ़ती गई. आंदोलन को उस वक्त और बड़ा मोड़ मिला, जब जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस विरोध प्रदर्शन से जुड़ गए और भूख हड़ताल पर बैठ गए।

वांगचुक की भूख हड़ताल और उसका असर
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया. उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल से अस्पताल ले गई, जहां मेडांटा में उन्होंने 23 जुलाई की रात अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की. इस दौरान आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच तनाव और गहराता चला गया, जिसका असर आने वाले दिनों में और साफ नजर आया।

संसद चलो मार्च के दौरान क्या हुआ
आंदोलन में सबसे बड़ा मोड़ 20 जुलाई को आया, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर कूच करने के लिए “संसद चलो” मार्च का आह्वान किया. पुलिस का कहना था कि इस मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई थी, और इसी दौरान छात्रों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने की खबरें सामने आईं. इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में व्यापक नाराजगी देखी गई, और पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे। इसी दबाव के बीच 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन उस समय खत्म हुआ, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिकाएं दाखिल हुईं
पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है. कुछ याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि किसी रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग या विशेष जांच दल गठित किया जाए, जो प्रदर्शन के दौरान हुई कथित ज्यादती, महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी और मनमानी गिरफ्तारियों की जांच कर सके. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अकादमिक आलोचना के खिलाफ बीएनएस की धारा 152 का दुरुपयोग न किया जाए, जब तक कि सीधे तौर पर सशस्त्र विद्रोह भड़काने की स्थिति न हो।

अदालत ने क्या टिप्पणियां कीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति ज्योमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि सिर्फ किसी जगह आंदोलन चल रहा है, इस आधार पर पुलिस द्वारा ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कहीं ज्यादती हुई है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, और यह मसला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक समान प्रोटोकॉल तय किए जाने की जरूरत को दर्शाता है। सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों की तरफ से भी एक याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए कहा कि चाहे पुलिसकर्मी हो या छात्र, हर व्यक्ति की जान बराबर मायने रखती है।

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आगे क्या होगा
अदालत ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं और हस्तक्षेप आवेदनों को एक साथ जोड़ते हुए 28 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है. इस सुनवाई में पुलिस की भूमिका, इस्तेमाल किए गए बल की मात्रा और भविष्य में प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जैसे कई अहम पहलुओं पर विचार होने की उम्मीद है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि सरकार की तरफ से इस मामले में पूरी निष्पक्षता से सहयोग किया जाएगा. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत आगे इस मामले में क्या दिशा-निर्देश जारी करती है, जिनका असर सिर्फ इस एक घटना तक नहीं बल्कि देशभर में भविष्य के प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर भी पड़ सकता है।

 

Q1. NEET Paper Leak Protest क्या है?

उत्तर: NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने NEET Protest पर क्या कहा?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और यदि पुलिस द्वारा किसी प्रकार की ज्यादती हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

Q3. अगली सुनवाई कब होगी?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए निर्धारित की है।

Q4. प्रदर्शन के दौरान विवाद क्यों हुआ?

Q5. याचिकाओं में क्या मांग की गई है?

उत्तर: याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, कथित ज्यादती की जांच के लिए आयोग या एसआईटी के गठन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा की मांग की गई है।

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