
JPSC Members Istifa: विधानसभा घेराव के बीच तीन सदस्यों का इस्तीफा, जानें पूरा मामला
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अब 16वें दिन विधानसभा घेराव तक पहुंच गया। रविवार को सरकार और छात्रों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई, करीब पांच घंटे तक चली यह मैराथन वार्ता आखिर में पूरी तरह बेनतीजा रही। इसी बीच सबसे बड़ी खबर आई, JPSC सदस्यों का इस्तीफा हो गया, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने तुरंत इसे स्वीकार भी कर लिया।
आंदोलन की जड़ कहां है
पूरा मामला जुड़ा है JSSC-CGL परीक्षा और JPSC की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित धांधली से। छात्रों का आरोप है कि इन परीक्षाओं में पेपर लीक हुआ और नियुक्तियों में गड़बड़ी की गई। यही वजह है कि छात्र लगातार 16 दिनों से रांची में डटे हुए हैं, और उनकी सबसे बड़ी मांग है JSSC-CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना और मामले की सीबीआई जांच कराना।
सरकार ने क्या प्रस्ताव रखा
रविवार को हुई बातचीत में झारखंड सरकार की तरफ से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा मौजूद रहे। बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि कथित गड़बड़ियों के आपराधिक पहलुओं की जांच सीआईडी करेगी, जबकि वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ईडी से भी जांच की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। सरकार ने 14वीं JPSC पीटी परीक्षा, रेगुलर और बैकलॉग दोनों, को रद्द करने पर भी सहमति जताई।
फिर भी क्यों टूटी बातचीत
इतने प्रस्तावों के बावजूद बात नहीं बनी, क्योंकि छात्र अपनी मुख्य मांग पर अड़े रहे, JSSC-CGL परीक्षा की सीबीआई जांच। सरकार का दावा है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं, लेकिन छात्र प्रतिनिधि इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक सीबीआई जांच का ऐलान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
JPSC सदस्यों का इस्तीफा और आगे का घटनाक्रम
इसी तनाव भरे माहौल के बीच बड़ा घटनाक्रम हुआ, JPSC सदस्यों का इस्तीफा सामने आया। आयोग के अध्यक्ष एल. खियांगते के बाद जमाल अहमद ने भी इस्तीफा दे दिया, जिसे राज्यपाल ने तुरंत मंजूर कर लिया। कुल मिलाकर तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई है, जिसे आंदोलन के दबाव का नतीजा माना जा रहा है।
सोमवार को क्या हुआ
बातचीत नाकाम होने के बाद छात्रों ने ऐलान किया कि सोमवार, 10 अगस्त को वे शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा का घेराव करेंगे। सुबह 10 बजे मार्च शुरू हुआ, और छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकलकर विधानसभा की तरफ बढ़े। नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो एंबुलेंस में सवार होकर इस मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इस दौरान पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर से भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में भी ले लिया।
सुरक्षा के कैसे इंतजाम रहे
विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। नए विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में झारखंड हाईकोर्ट को छोड़कर बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई थी, यानी उस इलाके में सभा-जुलूस पर पाबंदी रही। कंटीले तारों से कई लेयर की बैरिकेडिंग भी की गई थी।
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आगे क्या होगा
फिलहाल छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मुख्य मांग यानी सीबीआई जांच पूरी नहीं होती, आंदोलन थमने वाला नहीं है। JPSC सदस्यों का इस्तीफा आंदोलन की एक बड़ी जीत जरूर माना जा रहा है, लेकिन छात्रों की नजर अब भी सीबीआई जांच के ऐलान पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।
Q1. JPSC के कितने सदस्यों ने इस्तीफा दिया?
उत्तर: JPSC के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दिया है
Q2. JPSC सदस्यों ने इस्तीफा कब दिया?
उत्तर: JPSC सदस्यों का इस्तीफा 9 अगस्त 2026 को सामने आया
Q3. JPSC सदस्यों का इस्तीफा किसने स्वीकार किया?
उत्तर: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस्तीफे स्वीकार किए
Q4. JPSC सदस्यों के इस्तीफे की खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र आंदोलन चल रहा है
Q5. छात्रों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: छात्रों की प्रमुख मांग JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की है